
विधानसभा चुनावों की घोषणा का असर सबसे पहले नेताओं में सुगबुगाहट पैदा करती है।खासकर क्षेत्र के वर्तमान विधायक के मन में यह सुगबुगाहट ज्यादा होती है ताज पाने से ज्यादा महत्वपूर्ण ताज बचाने का होता है।
विधानसभा चुनाव की आहट शुरू होते ही जमालपुर विधानसभा से विधायक और ग्रामीण विकास मंत्री शैलेश कुमार के मन में यह चिंता जरूर हो रही होगी।वैसे नीतीश कुमार द्वारा उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना उनकी मजबूत स्थिति का प्रमाण है पर राजनीति में किस कारण,कौन मोहरे कब बदल दिए जाएं यह कहना मुश्किल होता है।जमालपुर के विधायक का यह चौथा कार्यकाल है लंबे समय तक विधायक होने का अगर फायदा होता है तो नुकसान भी होता है।नुकसान एन्टी इनकम्बेंसी की वजह से होता है वोटरों से ज्यादा वोट के ठेकेदारों की नाराजगी किसी की जीत हार में निर्णायक हो जाती है।सूत्रों की मानें तो वर्तमान विधायक के टिकट पर कोई खतरा नहीं है पर आकाओं के मन में चल रहे प्लानिंग,नई परिस्थितियां कब अप्रत्याशित परिणाम लेकर आ जाये यह कौन जानता है।
2015 के चुनाव में महागठबंधन से जदयू के शैलेंद्र कुमार व एनडीए से लोजपा के ई.हिमांशु कुमार का मुकाबला हुआ था।राजनीति के नए खिलाड़ी हिमांशु कुमार महागठबंधन की लहर में पत्ते की तरह बह गए।मौजूदा स्थिति की बात करें तो हिमांशु कुमार की उम्मीदवारी की सम्भावना ही खत्म है।
जमालपुर सीट पर जदयू का उम्मीदवार ही होगा यह भी तय है उनके मुकाबले में महागठबंधन की ओर से कौन उम्मीदवार किस दल का होगा यह अभी अनिश्चित है।वैसे कांग्रेस के कई नेता जमालपुर की सीट कांग्रेस को देने की मुहिम चलाते रहे हैं। पर गठबंधन की वजह से पिछले चुनावों में कांग्रेस का कोई उम्मीदवार यहां से चुनाव नहीं लड़ पाया है।
मुंगेर विधानसभा से जदयू की उम्मीदवारी पाने की मंशा पाले प्रीतम सिंह की नजर जमालपुर विधानसभा पर भी है।कोरोना काल में उनके द्वारा चलाये गए राहत कार्यों का विस्तार जमालपुर विधानसभा क्षेत्र में हुआ।उनके नजदीकी कहते हैं कि मुंगेर से जदयू की उम्मीदवारी नहीं मिलने की स्थिति में वो जमालपुर से राजद की उम्मीदवारी लेने से भी परहेज नहीं करेंगे।