
बताते चले कि मुंगेर विधानसभा यादव व मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता रहा है पर यहां वैश्यों के सम्मिलित समूह की आबादी सबसे ज्यादा है।पर कभी भी किसी मुख्य दल ने वैश्य उम्मीदवार पर भरोसा नहीं जताया।कांग्रेस राजद जदयू यहां तक कि भाजपा ने भी अल्पसंख्यक अजफर शमशी और प्रणव कुमार(यादव) पर ही भरोसा जताया।
वैसे मुंगेर विधानसभा में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का इतिहास भी पुराना रहा है।परिसीमन के पूर्व कांग्रेस व जनता पार्टी के अल्पसंख्यक उम्मीदवार यहां से चुनाव जीतते रहे फिर जनता दल के गठन के बाद रामदेव सिंह यादव व बाद में मोनाजिर हसन ने माय समीकरण के बूते अपना कब्जा जमाया।लेकिन मोनाजिर हसन के जनता दल यू में शामिल होने व उनके बेगूसराय से सांसद चुने जाने के बाद हुए उपचुनाव में अप्रत्याशित रूप से एक कट्टर संघी जगन्नाथ गुप्ता ने राजद उम्मीदवार की हैसियत से मुंगेर विधानसभा का चुनाव जीत लिया।संघ के कार्यकर्ता को राजद से चुनाव लड़ाने की जयप्रकाश नारायण यादव की रणनीति काम आई और बाजार के बहुसंख्यक तबके ने राजद के उम्मीदवार को अपना समर्थन दे दिया।उस वक्त जदयू के उम्मीदवार मो सलाम चुनाव हार गए।इसबार के चुनाव में राजद वर्तमान विधायक पर अपना विश्वास कायम रखती है या फिर किसी अल्पसंख्यक को उम्मीदवारी देती है यह देखने की बात है यदि ऐसा होता है और भाजपा पुनः प्रणव कुमार पर भरोसा जताती है तो इस बार उनकी जीत की पक्की सम्भावना होगी।
वैसे सूत्रों की मानें तो मुंगेर विधानसभा 2005 व 2010 की तर्ज़ पर फिर से जदयू के कोटे में जाने की पूरी सम्भावना है।फिलवक्त मुंगेर के सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की भी यही मंशा है।ऐसी स्थिति में उनके किसी चहेते को जद यू की उम्मीदवारी मिलनी तय है।जदयू के उम्मीदवारों में ललन सिंह के चहेते व कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मुंगेर से चुनाव लड़ चुके जदयू पिछड़ा प्रकोष्ठ के नेता प्रीतम सिंह का नाम सबसे ऊपर है।उनपर नीतीश कुमार के विश्वस्त आर सी पी की भी कृपा बनी हुई है।
अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के फार्मूले के तहत जदयू खेमे से मो सलाम की पत्नी का नाम भी उछल रहा है।
राजद के वर्तमान विधायक विजय कु विजय भी हुलुक बलुक कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस बार राजद की उम्मीदवारी मिलने में सन्देह है।परंतु जदयू खेमे में उनकी उपयोगिता शायद शून्य है।राजद खेमे से सबसे मजबूत दावेदारी अविनाश कु विद्यार्थी उर्फ मुकेश यादव की है।वो पहले रालोसपा से जुड़े थे और मुंगेर-जमुई-लखीसराय-शेखपुरा स्थानीय निकाय क्षेत्र से विधान पार्षद का चुनाव भी लड़ चुके हैं फिलवक्त वो राजद के राष्ट्रीय महासचिव हैं व तेजस्वी यादव के करीबी व विश्वस्त लोगों में इनकी गिनती होती है।
राजद खेमे से अगर अल्पसंख्यक को उम्मीदवारी देने की सम्भावना बनी तो फिलवक्त कोई कद्दावर व जिताऊ उम्मीदवार नहीं दिखता पर AK 47 मामले में चर्चा में रहे मो चांद की पत्नी जिला पार्षद रूही चांद की किस्मत खुल सकती है।