तारापुर विधानसभा पर 2010 से जनता दल यू का कब्जा है।2010 में वर्तमान विधायक डॉ मेवालाल चौधरी की पत्नी स्व नीता चौधरी ने लगातार पांच बार विधायक रहे शकुनि चौधरी को शिकस्त देकर तारापुर का चुनाव जीता।2010 के चुनाव में उनके पति डॉ मेवालाल ने भी अपना कब्जा बरकरार रखा।डॉ मेंंवा लाल चौधरी की ह कुमार सेे निकटता को देखते हुुये की मडॉक्टर मेवालाल चौधरी की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निकटता को देखते हुए उन्हें पुनः उम्मीदवारी मिलनी निश्चित है।उनके लिए शुकुन की बात यह भी के उनके चिर प्रतिद्वंदी शकुनी चौधरी ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया है।उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी सम्राट चौधरी अब भाजपा के विधानपार्षद हैं। वैसे कोई डार्क हॉर्स निकल आए तो कहना मुश्किल है। तारापुर विधानसभा क्षेत्र जदयू के आधार मतदाताओं की बहुलता वाला क्षेत्र है।हालांकि खड़गपुर विधानसभा के विलुप्त होने और उसमें शामिल राजपूत बहुल इलाकों को तारापुर में शामिल कर देने से राजपूत मतदाताओं की संख्या बढ़ी है।वर्तमान राजनीतिक रुझानों की बात करें तो राजपूत,ब्राह्मण व भूमिहार मतदाता एनडीए के पक्ष हीं मतदान करेंगे। वैसे विकास योजनाओं की बात करें तो तारापुर और खड़गपुर काफी पिछड़ा माना जाता है तारापुर व खड़गपुर दोनों अनुमंडल है। हाल में खड़कपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज खोले जाने की घोषणा को वर्तमान विधायक की उपलब्धि माना जा सकता है।लेकिन जनता को भी अब विकास से कहां लेना देना, चुनाव आते आते सारे मतदाता जातीय या दलगत गोलबंदी में लग जाते हैं। वैसे महागठबंधन की ओर से कौन यहाँ से कैंडिडेट होगा इसपर डॉ मेवालाल जी का भविष्य निर्भर करेगा।