खगड़िया विधानसभा

आज हम पहुंचे हैं मुंगेर प्रमंडल के खगड़िया जिले में,इस जिले में चार विधानसभा की सीटें हैं।खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता और अलौली(सु)।जिला मुख्यालय की सीट होने की वजह से इसका विशेष महत्व है।खगड़िया विधानसभा से श्रीमती पूनम यादव विधायक हैं।2005 से ये लगातार जनता दल यू के टिकट पर विधायक बनी हुई हैं।श्रीमती पूनम यादव जिला मुख्यालय से सटे चूकती ग्राम की बहू हैं इस ग्राम का खगड़िया की राजनीति पर दशकों से कब्जा रहा है।1972 में इनके ससुर रामशरण यादव तत्कालीन भारतीय जनसंघ के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए थे तब से लेकर बीच के एक दशक को छोड़ चूकती घराने से कोई न कोई सांसद या विधायक चुना जाता रहा है।इन्हें राजनीति अपने पति से विरासत में मिली है,इनके राजनीति में आने से पहले इनके पति रणवीर यादव 1990 में खगड़िया सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए थे जिनकी गिनती बिहार के बाहुबलियों में शुमार होती थी। विधायक चुने जाने के बाद उन्हें एक सामूहिक नरसंहार के मामले में उम्रकैद की सजा हो गयी तो अपनी विरासत पत्नी श्रीमती पूनम यादव को सौंप दिया।यहां बताते चलें कि रणवीर यादव ने दो शादियां की हैं और पूनम यादव की छोटी बहन श्रीमती कृष्णा यादव इनकी दूसरी पत्नी हैं।उन्होंने भी लोकसभा का चुनाव लड़ा पर असफल रहीं।वैसे जिला पार्षद व जिला परिषद अध्यक्ष होने का अवसर उन्हें भी मिल चुका है।
खगड़िया जिला पिछड़े जिलों में शुमार होता है और लगभग हर वर्ष इसका बड़ा इलाका बाढ़ की त्रासदी झेलने को विवश है।इस जिले में समाजवादी व वामपंथी दलों का खासा प्रभाव रहा है।खगड़िया और जिले की बेलदौर सीट पर सीपीआई व सीपीएम के उम्मीदवार चुनाव लड़ते और जीतते रहे हैं।आगामी चुनाव में भी पूनम यादव की उम्मीदवारी पर कोई संकट नहीं दिखता और एनडीए के बने रहने की स्थिति में समीकरण के अलावा अपनी जाति के मतदाताओं पर व्यक्तिगत प्रभाव के चलते इनकी जीत की भी पूरी सम्भावना दिखती है।
परन्तु सबकुछ दावे के साथ नहीं कहा जा सकता राजनीति में कब कौन रास्ता रोक खड़ा हो जाये और मात दे दे यह कहना मुश्किल है।वैसे खगड़िया की जनता ने पहली बार इतने धैर्य का परिचय दिया है कि ये लगातार तीसरी बार इस सीट से चुनी गई है।इनके पहले इनके चाचा ससुर रामशरण यादव को ही यह सौभाग्य मिल पाया था।बाकी खगड़िया के बारे में यह प्रचलित था कि यहां की जनता दोबारा मौका नहीं देती है।
इंतजार है चुनाव के घोषणा के एलान होने का तब फिर हमारा चुनावी घोड़ा पहुंचेगा खगड़िया और जानेगा खगड़िया के जनता जनार्दन के मन की बात।
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